यदा यदा ही धर्मस्य…

गाँव जाना मुझे हमेशा ही अच्छा लगता रहा है, मेरे चेहरे के अतिउत्साह को साफ़ पढ़ा जा सकता है, गाँव जाने के उल्लेख मात्र से। जब भी हम गाँव जाते थे तो रास्ता जैसे कटता ही नहीं था जब तक की हम गाँव के बाज़ार तक ना पहुँच जाएँ।मँगारी बाज़ार बाबतपुर स्टेशन से लगा ही…

My Vivekananda Moment!

The ‘Uber’ application popped up the booked cab details. The name of the driver was interesting, ‘Nek’. While I was struggling to button my shirt in a rush, my mind afforded to spend little time to acknowledge the uniqueness of this name. The first impression which flashed in my mind was, it is ‘Nick’ and…