The ‘Face’ called Wisdom…in the crowd of Beliefs!

If I am able to see and recognize “Faces” around, it affirms that I have eyes. If I have eyes to see, brain to observe, mind to think, heart to feel, and ways to express, it only confirms that “I” exist. If I exist, I must be wearing a worldly identity. A worldly identity assures…

यदा यदा ही धर्मस्य…

गाँव जाना मुझे हमेशा ही अच्छा लगता रहा है, मेरे चेहरे के अतिउत्साह को साफ़ पढ़ा जा सकता है, गाँव जाने के उल्लेख मात्र से। जब भी हम गाँव जाते थे तो रास्ता जैसे कटता ही नहीं था जब तक की हम गाँव के बाज़ार तक ना पहुँच जाएँ।मँगारी बाज़ार बाबतपुर स्टेशन से लगा ही…